संवैधानिक प्रावधान

भारत के संविधान के भाग 3 (‘‘मूल अधिकार’’) और भाग 4
(‘‘राज्य की नीति के निदेशक तत्व’’) के ‘‘श्रम’’ संबंधी प्रावधान

मूल अधिकार

स्वातंत्र्य-अधिकार

अनुच्छेद 19:    वाक्-स्वातंत्र्य आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षणः

(1)    सभी नागरिकों को –
(ग)    संगम या संघ बनाने का, अधिकार होगा।

शोषण के विरूध्द अधिकार

अनुच्छेद 23: मानव के दुव्र्यापार और बलात् श्रम का प्रतिषेध :
(1)    मानव का दुव्र्यापार और बेगार तथा इसी प्रकार का अन्य बलात् श्रम प्रतिषिद्ध किया जाता है और इस उपबंध का कोई भी उल्लंघन अपराध होगा जो विधि के अनुसार दंडनीय होगा।

अनुच्छेद 24: कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध :
चौदह वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने या खान में काम करने के लिए नियोजित नहीं किया जाएगा या किसी अन्य परिसंकटमय नियोजन में नहीं लगाया जाएगा।

राज्य की नीति के निदेशक तत्व

अनुच्छेद 39: राज्य द्वारा अनुसरणीय कुछ नीति तत्व :
राज्य अपनी नीति का, विशिष्टतया, इस प्रकार संचालन करेगा कि सुनिश्चित रूप से :
(क)    पुरूष और स्त्री सभी नागरिकों को समान रूप से जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त करने का अधिकार हो,
(घ)    पुरूषों और स्त्रियों दोनों का समान कार्य के लिये समान वेतन हो,
(ङ)    पुरूष और स्त्री कर्मकारों के स्वास्थ्य और शक्ति का तथा बालकों की सुकुमार अवस्था का दुरूपयोग न हो और आर्थिक आवश्यकता से विवश होकर नागरिकों को ऐसे रोजगारों में न जाना पड़े जो उनकी आयु या शक्ति के अनुकूल न हों,
(च)    बालकों को स्वतंत्र और गरिमामय वातावरण में स्वस्थ विकास के अवसर और सुविधाएं दी जाएं और बालकों और अल्पवय व्यक्तियों की शोषण से तथा नैतिक और आर्थिक परित्याग से रक्षा की जाए।

अनुच्छेद 41: कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकारः

राज्य अपनी आर्थिक सामथ्र्य और विकास की सीमाओं के भीतर, काम पाने के, शिक्षा पाने के और बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी और निःशक्तता तथा अन्य अनर्ह अभाव की दशाओं में लोक सहायता पाने के अधिकार को प्राप्त कराने का प्रभावी उपबंध करेगा।

अनुच्छेद 42: काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध:

राज्य काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं को सुनिश्चित करने के लिए और प्रसूति सहायता के लिए उपबंध करेगा।

अनुच्छेद 43: कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि :

राज्य, उपयुक्त विधान या आर्थिक संगठन द्वारा या किसी अन्य रीति से कृषि के, उद्योगों के या अन्य प्रकार के सभी कर्मकारों को काम, निर्वाह मजदूरी, शिष्ट जीवन-स्तर और अवकाश का संपूर्ण उपभोग सुनिश्चित करने वाली काम की दशाएं तथा सामाजिक और सांस्कृतिक अवसर प्राप्त कराने का प्रयास करेगा

अनुच्छेद 43-कः उद्योगों के प्रबंध में कर्मकारों का भाग लेना:
    
राज्य किसी उद्योग में लगे हुए उपक्रमों, स्थापनों या अन्य संगठनों के प्रबंध में कर्मकारों का भाग लेना सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त विधान द्वारा या किसी अन्य रीति से कदम उठाएगा।