General Welfare Activities

मंडल द्वारा निम्नलिखित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं

श्रमिक कल्याण केंद्र

प्रदेश में नौ स्थानों- जबलपुर बुरहानपुर इंदौर सीहोर भोपाल ग्वालियर प्रतापपुरा जिला टीकमगढ़ पीथमपुर एवं रीवा- पर श्रमिकं कल्याण केंद्र संचालित हैं।

छात्रवृत्ति

औद्योगिक इकाइयों एवं स्थापनाओं में कार्यरत्‌ श्रमिकों के पुत्र/पुत्रियों को छात्रवृत्ति का लाभ दिया जा रहा है। कक्षा आठवीं से बारहवीं स्नातक आइ.टी.आइ. पोलिटेक्निक बी.ई. तथा एम.बी.बी.एस. के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति दी जाती है।

श्रमिक खेलकूद

प्रदेश के विभिन्न संभागों में प्रति दो वर्ष के अंतराल में संभागीय श्रमिक खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।

उत्तम श्रमिक पुरस्कार

हर वर्ष प्रदेश के दस श्रमिकों को उनकी कार्यकुशलता अनुशासन तथा सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में उल्लेखनीय योगदान हेतु उत्तम श्रमिक पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।

श्रमिक साहित्य पुरस्कार

हर वर्ष प्रदेश के दस श्रमिकों को उनकी कार्यकुशलता अनुशासन तथा सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में उल्लेखनीय योगदान हेतु उत्तम श्रमिक पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।

गणेश विसर्जन झांकियों को पुरस्कार

इन्दौर में प्रतिवर्ष अनंत चतुर्दशी के अवसर पर श्रमिकों द्वारा निकाले जाने वाली श्रेष्ठ झांकियों को पुरस्कार-स्वरूप शील्ड एवं नकद राशि प्रदान की जाती है।

कापी-किताबों का वितरण

प्रदेश के श्रमिकों के पुत्र-पुत्रियों को कक्षा पहली से सातवीं तक, बाजार मूल्य से आधी दरों पर, कापी-किताबों का वितरण किया जाता है।

सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण

मंडल द्वारा संचालित कल्याण केंद्रों में अनेक स्थानों पर श्रमिक परिवारों की महिलाओं तथा बालिकाओं के लिये सिलाई प्रशिक्षण की व्यवस्था है

विधवा पेंशन

०१ अप्रैल २००३ से श्रमिकों की विधवाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्‌देश्य से विधवा पेंशन योजना का प्रस्ताव अनुमोदित किया गया हैं। श्रमिकों की विधवाओं को पेंश्न के रूप में १००/- प्रतिमाह प्रदान किया जायेगा । वितरित की जाने वाली राशि को वर्ष में ४ बार यानी प्रत्येक तिमाही में भुगतान किया जायेगा । यह पेंशन उन श्रमिकों की विधवाओं को प्रदान की जा सकेगी । जो मध्यप्रदेश श्रम कल्याण निधि अधिनियम १९८२ के अंतर्गत आने वाली किसी स्थापना/संस्थान में कम से कम एक वर्ष निरंतर कार्यरत रहे हो । पेंशन हेतु आवेदिका को संस्थान के माध्यम से यह प्रमाणित करना होगा कि मृत श्रमिक विगत १ वर्ष से निरंतर उनके संस्थान/स्थापना में कार्यरत रहा हैं। आवेदिका मृत श्रमिक की पत्नि है तथा उसे अन्य किसी जगह से पेशन प्राप्त नही हो रही हेै । अथवा प्राप्त करने की पात्रता नही है,तो उसे मंडल द्वारा पेंशन सुविधा प्रदान की जा सकेगी । विधवा पेंश्न का लाभ जो ई.एस.आई. में कव्हरेज नही है उन्ही को दिया जायेगा ।

अंतिम संस्कारों के लिये मजदूरों को सहायता प्रदान की जाना श्रमिक खेलकूद

०१ अप्रैल २००३ से अंतिम संस्कार के लिये मजदूरों को सहायता प्रदान करने हेतु रू. ७५० /- सहायता राशि के रूप में प्रदान की जाने का निर्णय लिया गया हैं । यह सहायता श्रमिक (पुरूष/स्त्री) के मरणोपरांत श्रमिक की पत्नि/श्रमिक अथवा उसके ज्येष्ठ पुत्र, अथवा जो पुत्र संस्कार करे उसे दी जावेगी । पुत्र न होने की स्थिति में जो भी अंतिम संस्कार करेगा उसे यह राशि प्रदान की जा सकती हेै । आवेदक द्वारा नियोजक से यह सत्यापित कराना होगा कि मृत श्रमिक उनके संस्थान /स्थापना में कार्यरत था, इस प्रमाणिकरण के पश्चात सहायता राशि जारी की जायेगी । इस योजना का लाभ केवल उन श्रमिकों को प्रदान किया जा सकेगा जहां ई.एस.आई. सेवाएं लागू नही है। ६५००/- प्रतिमाह से अधिक वेतन प्राप्त करने वाले श्रमिकों को भी इस योजना का लाभ नही प्रदान किया जायेगा

शारीरिक असमर्थता पर सहायता राशि प्रदान की जाना

म.प्र.श्रम कल्याण मंडल निधि अधिनियम १९८२ के क्षेत्राधिकार में आने वाली स्थापनाओं एवं संस्थानों में कार्यरत रहे ऐसे श्रमिकों को जो अब शारीरिक रूप से जीविका पार्जन में असमर्थ है। ०१ अप्रैल २००३ से ६००/- प्रतिवर्ष (५० प्रतिमाह ) सहायता राशि प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया हेै। जहां ई.एस.आई. सेवाओं या अन्य प्रकार की किसी सुविधा का लाभ दिया जा रहा होगा तो यह सहायता प्रदान नही की जा सकेगी । आवेदक द्वारा नियोजक से यह सत्यापित कराया जाना होगा कि वह उनके संस्थान/स्थापना में विगत ५ वर्ष से कार्यरत था, तथा दुर्घटना में वह हताहत हुआ है तथा उसे विकलांगता का प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा यदि उसकी विकलांगता इस श्रेणी की हेै की वह उस संस्थान में कार्य करने में असमर्थ ठहरा दिया गया है तो इस प्रमाणिकरण के पश्चात सहायता राशि जारी की जायेगी । ०१ अप्रैल २००३ से यह योजना लागू की गई है।

प्रदेश के श्रमिकों को चिकित्सा अनुदान प्रदान किया जाना

०१ अप्रैल २००३ से जिन स्थापनाओं एवं संस्थानों में ई.एस.आई. की सुविधा नही है वहां चिकित्सा अनुदान लागू किया जाता है। बडी बिमारी हेतु एक बार में अधिकतम रू. १५००/- (विशेष स्थिति को छोडकर ) एवं अन्य बिमारियों हेतु रू. ३००/- अधिकतम दिये जा सकेगे। विशेष स्थिति को छोडकर वर्ष में एक मजदूर को अधिकतम १५००/- रूपये का चिकित्सा अनुदान दिया जा सकेगा यह योजना भी ०१ अप्रैल २००३ से लागू है।